Munda Chahida

मुंडा चाहिदा है तां तू ही जम्म ले – “मुंडा ही चाहिदा”

पंजाबी के डायरेक्टर्स दीपक थापर और संतोष थिटे द्वारा बनायीं क्षेत्रीय भाषा की पंजाबी फिल्म “मुंडा ही चहिदा” एक हास्यपर्द और सामाजिक फिल्म है जो की धर्मिंदर (हरीश वर्मा ) नामक किरदार के आस पास घूमती है जो की अपनी पत्नी, दो बेटियों, अपने पिता, दादी, तीन बहनों के साथ रहता है। बेटे होने की लालसा में उसकी पत्नी एक बार फिर से गर्भवती होती है पर इस बार सभी के बार बार कहने पर बेटे होने की पूरी उम्मीद होती है | फिल्म में किरदार को ये लगने लग जाता है कि उसका घर औरतो से घिरा हुआ है क्योकि घर में उसके इलावा सभी लड़कियां और औरत ही रहती है | लड़के कि इच्छा इतनी प्रबल हो जाती है कि वो झूठे पाखंडियों के हथ्थे चढ़ जाता है और अंधविश्वासी में पूरा लिप्त हो जाता है और वह सब कुछ करता हैं जो साधु बाबा उसे कहता हैं | इस कारन वो एक स्थानीय साधु का अपमान भी करता है जो उसे एक गर्भवती पिता के रूप में कार्य करने के लिए कहता है। फिल्म कि सारी घटना मुख्य किरदार को अपने निजी स्वार्थ से बाहर निकालने की हैं

किरदार के रूप में

फिल्म में मुख्या भूमिका में हरीश वर्मा जिसका नाम धर्मेंद्र हैं उसके साथ रुबीना बाजवा जो की रानी के नाम से धर्मेंदर की पत्नी का रोल अदा कर रही हैं | फिल्म में रानी को बहस करना बिलकुल पसंद नहीं होता और वह हर स्थिति में खुश रहती है| जसपाल भट्टी के साथ आने वाली कलाकार जितेंदर कौर ने दादी की भूमिका निभाई हैं जिन्हे लड़के की इच्छा रहती हैं | इस फिल्म के प्रोडूसर नीरू बाजवा, अंकित विजन, नवदीप नरूला , गुरजीत सिंह है | फिल्म के गीत मन्नत नूर, रोशन प्रिंस, कमल खान ने गए है |

पोस्टर से झलकती फिल्म

शानदार ढंग से तैयार की गयी ये पारिवारिक फिल्म हास्य मनोरंजन से भरपूर हैं | फिल्म का ट्रेलर और पोस्टर ही दर्शको की क्लियर कर देता हैं की फिल्म किस घटना के इर्द गिर्द घूमेगी उसमे मसाला लगाने के लिए निर्देशक ने मुख्या किरदार को भी गर्भवती के रूप में दिखाया हैं | आदमी अगर बच्चे पैदा करे तो क्या परस्थिति बनेगी इसको लेकर हास्य पर्द फिल्म हैं | प्रशंसकों के मनोरंजन को ध्यान में रखते हुए फिल्म का निर्माण किया गया हैं जिस पर वो खरा भी उत्तरी हैं |

फिल्म की रोचकता

फिल्म के शुरू में परिवार का परिचय होता हैं जिससे ये पता चलता हैं की वो घर मे

रोटी कमाने वाला अकेला है| परिवार में हर किसी की जरुरत को पूरा करने के लिए उसकी खुद की दुर्दश बनी रहती हैं | हास्य के साथ साथ भावनाओ का एक अनोखा जोड़ दिया है | फिल्म का आधा हिस्सा घर में एक बेटा पैदा करने की इच्छा को सपर्पित होता है | अगले हिस्से में धर्मेंद्र के व्यवहार और काम में आये से सभी दंग रह जाते है फिल्म में एक डायलॉग का विशेष उल्लेख – “नो शी नो नो हे”, “ओनली जी” कई बार होता है |

पूरी फिल्म पंजाब के इस प्रमुख मुद्दों पर प्रकाश डालती है | उत्तर भारत में ज्यादातर हर घर में लड़का होने की इच्छा ज्यादा होती है |