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zero movie review. शाहरुख खान के किरदार की तरह बौनी साबित हुई जीरो

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आनन्द एल. राय की फ़िल्म ज़ीरो से दर्शकों को जीतने उम्मीदें थी उन्हें पूरा करने में नाकाम साबित हुई ज़ीरो। एक साल बाद दर्शकों के सामने आए शाहरुख खान की यह फ़िल्म चुनौतीपूर्ण भूमिका निभाने के बाद भी कुछ खास कमाल नहीं दिखा पाई। यह सही है कि एक बौने के किरदार को बड़े पर्दे पर प्रस्तुत करना कोई आसान काम नहीं होता । इस फ़िल्म में शाहरुख खान को देखकर कमल हासन की अप्पू राजा की याद सहज ही दिमाग में आ जाती है लेकिन अफसोस कि उस समय तकनीक की कमी के कारण हज़ार मुश्किलों के बाद भी अप्पू राजा दर्शकों की वाहवाही लूटने में सफल रही थी। इससे पहले आनन्द एल. राय रांझणा और तनु वेड्स मनु जैसी सुपरहिट फिल्में ला चुके हैं जो आज भी दर्शकों को गुदगुदाने पर मजबूर कर देती हैं लेकिन इस फ़िल्म को बनाने में उनसे कहीं ना कहीं भारी चूक हो गई।

फ़िल्म का पहला हिस्सा जहां दर्शकों को बांधे रखता है वहीं अगला हिस्सा इतना उबाऊ हो जाता है कि दर्शक घड़ी में गुजरते समय को देखते हुए फ़िल्म के खत्म भर हो जाने का इंतज़ार करते नज़र आते हैं। सुपरस्टारों की बेमतलब की भीड़ भी  दर्शकों पर कोई खास छाप नहीं छोड़ पाई। अनुष्का शर्मा की बात करें तो उन्होंने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत शाहरुख के साथ रब ने बना दी जोड़ी से की थी। इस फ़िल्म में भी दोनो की कैमस्ट्री लाज़वाब रही। कैटरीना की बात करें तो उन्होंने इस फ़िल्म में सुपरस्टार बबिता का रोल निभाया है जिसे बउआ सिंह बने शाहरुख खान अपनी ड्रीमगर्ल मानते हैं। फ़िल्म की कहानी मेरठ शहर की गलियों के जिंदादिल बउआ सिंह और उसके दोस्त गुड्डू अर्थात जीशान आयूब की खट्टी मिट्ठी शरारतों से शुरू होती है।  बउआ सिंह का कद केवल 4 फिट का होने के कारण 38 वर्ष के उम्र में भी उसे शादी के लिए लड़की नहीं मिलती। इस तलाश में वह एक मैरिज ब्यूरो चलाने वाले पांडे जी के पास पहुँच  जाता है और वहां आफिया यानी अनुष्का की तस्वीर को देखकर उससे शादी करने का मन बनाता है।

पांडेय उसे यह सच नहीं बता पाता कि आफिया सेरेब्रल पाल्सी नामक बीमारी से पीड़ित है और चलफिर नहीं पाती। आफिया नासा की वैज्ञानिक है। आफिया से बउआ सिंह हैरान रह जाता है और इस तरह उनकी प्रेमकहानी शुरू हो जाती है। अचानक फ़िल्म में नया मोड़ आता है और शाहरुख को पता चलता है कि मेरठ में सुपरस्टार बबिता आई हैं तो वह शादी की रस्में बीच में ही छोड़कर उससे मिलने चला जाता है फिर उसके पीछे मुम्बई। जहां उसे सितारों की भीड़ दिखती है। बबिता उसे एहसास दिलाती है कि उस ने आफ़िया के साथ सही नहीं किया तो बउआ सिंह उसे मनाने अमेरिका यहां तक कि मंगल ग्रह पर भी पहुंच जाता है। यहीं आकर फ़िल्म की कहानी कहीं खो सी जाती है और निर्देशक के हाथों से छूटती हुई सी लगती है।

अगर सितारों की भीड़ में कुछ देखने लायक है तो वो वो है श्रीदेवी की एक झलक। फ़िल्म के क्लासिमेक्स को जबरदस्ती आगे घसीटा गया है। एक कम पढ़े लिखे बौने कद के  नौजवान का मंगल तक आफिया का पीछा करना,एक ही रात में अपने पिता के 6 लाख रुपए अपनी गर्लफ्रेंड पर लुटाना, सुपरस्टार बबिता का बउआ सिंह को देखकर इमोशनल हो जाना दर्शकों के गले से नहीं उतरता। कुल मिलाकर हम इस फ़िल्म को 5 में से 3 स्टार देंगे।

सुपर स्टार प्रियंका और निक जोनस की शादी जश्न 19 दिन बाद भी जारी

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1 और 2 दिसम्बर को प्रियंका चोपड़ा और निक जोनस ने बहुत ही शाही अंदाज में जोधपुर के उम्मेद पैलेस में ईसाई और हिन्दू धर्म के अनुसार शादी की। इस शाही शादी में अपना आशीर्वाद देने भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी भी पहुंचे थे। लेकिन महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रियंका और निक की शादी का जश्न अब भी जारी है। 19 दिसम्बर, बुधवार को प्रियंका और निक ने जुहू के शानदार होटल में शादी की भव्य रिसेप्शन दी जिसमें  फिल्मजगत के लगभग सभी सुपर स्टार इस नए जोड़े को बधाई देने पहुंचे। समारोह स्थल की खूबसूरती देखते ही बनती थी सफेद लिली आर्किड और सुंदर मोमबत्तियां से सजा हाल बेहद आकर्षक लग रहा था।

 

प्रियंका नील और सुनहरे रंग के लहंगे में बेहद सुंदर लग रही थी तो निक भी ग्रे सूट और काली शर्ट में खिल रहे थे। इस रिसेप्शन में आये सभी लोगों का धन्यवाद करने के बाद प्रियंका ने सबको सम्बोधित करते हुए निक को सबसे मिलवाया। प्रियंका ने कहा कि वे चाहती हैं कि निक उन सभी लोगों से मिलें जिन्होंने प्रिंयका के जीवन को निखारने में अपना योगदान दिया। उन्होंने अपने पिता को धन्यवाद दिया और कहा कि वे हमेशा उन्हें अपने आस-पास ही महसूस करती हैं।

 

इस अवसर पर प्रियंका को मां मधु चोपड़ा भी गोल्डन साड़ी में काफी खूबसूरत लग रही थी। खेल जगत के भी कई सितारे इस जश्न में शरीक हुए । इसके साथ ही सलमान खान नीले सूट में, कंगना पीले रंग की साड़ी में हेमा मालिनी नीले रंग की साड़ी में तथा एवरग्रीन सुंदरी रेखा अपने जाने-पहचाने अंदाज़ में उन्हें मुबारकबाद देने पहुंची। और भी कई कलाकारों ने उपस्थिति देकर इस समारोह को सफल बनाया। गौरतलब है कि इससे पहले 4 दिसम्बर को भी प्रियंका और निक ने अपनी शादी का जश्न मनाया था लेकिन उसके बाद निक को कुछ दिन के लिए न्यूयॉर्क वापिस जाना पड़ा और अब वह विशेषकर इस जश्न के लिए ही वापिस लौटे हैं। रणवीर और दीपिका की तरह यह इनकी शादी की दूसरी रिसेप्शन थी।

केदारनाथ मूवी review

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सुशांत सिंह राजपूत और सारा अली खान की हाल ही में रिलीज़ हुई फ़िल्म केदारनाथ का दर्शकों इंतज़ार था। इसके दो कारण थे एक तो इसमें केदारनाथ की त्रासदी के समय को दर्शाया गया था दूसरा दर्शक अमृता सिंह और सैफ अली खान की बेटी सारा अली खान की रुपहले पर्दे पर देखना चाहते थे। लेकिन एक फिल्म की सफलता केवल उसमें काम करने वाले कलाकारों पर ही नहीं बल्कि उसकी पटकथा, निर्देशन और छायांकन भी अहम भूमिका निभाते हैं। अभिषेक कपूर ने एक बहुत ही मजबूत विषय तो चुना लेकिन कमजोर पटकथा के कारण यह फ़िल्म दर्शकों के मन में कोई खास जगह नहीं बना पाई।  कहानी में कुछ भी नयापन नहीं है।

फ़िल्म का पहला आधा हिस्सा कहीं -कहीं इतना उबाऊ हो जाता है कि दर्शक बीच में ही कुर्सी छोड़ने पर मजबूर हो जाते हैं। मंसूर बने सुशांत और मुक्कू बनी सारा की प्रेम कहानी केदारनाथ तीर्थस्थल पर शुरू होती है। लेकिन दोनों के ही धर्म भिन्न होने के कारण मुक्कू के पंडित पिता इस रिश्ते का विरोध करते हुए कहते हैं कि “नहीं होगा यह संगम, चाहे प्रलय ही क्यों ना आ जाए” और उसकी शादी कहीं और तय कर देते हैं और मुक्कू उसी प्रलय को बुलाने की चेतावनी देती है। जहां  मुक्कू की मां मूक और बेबस बनी अपनी बेटी की कोई मदद नहीं कर पाती वहीं मंसूर की मां एकदम शक्की मिजाज और बात बेबात परेशान रहने वाली दिखाई देती हैं। कोई शक नहीं कि सारा ने इस फ़िल्म में बहुत ही दमदार रोल किया है उनके हाव-भाव बहुत ही निखर कर सामने आए हैं तथा पहाड़ी लड़की के किरदार के साथ भी उन्होंने पूरा न्याय किया है। कहीं कहीं वे चमेली की शादी वाली अमृता सिंह की भी याद दिलाती हैं।यहां तक कि सुशांत जैसे मंझे हुए कलाकार भी उसके आगे दबे हुए से नज़र आते हैं। सुशांत की अगर बात की जाए तो फ़िल्म में उनके किरदार को देखकर लगता है कि इस बार फिर उनसे एक गलत फ़िल्म का चुनाव हो गया जो उनके करियर पर प्रभाव डाल सकता है। कहीं भी वह खुलकर सामने आते नहीं लगते।

एक फ़िल्म का संगीत अगर उम्दा हो तो नीरस फ़िल्म को भी बरसों तक यादगार बनाए रख सकता है लेकिन यहां भी अभिषेक कपूर पूरी तरह चूक गए। संगीत पर उनका कोई ध्यान नहीं गया केवल”नमो-नमो” को छोड़कर कोई भी गाना दर्शकों को लुभा नहीं पाया। केदारनाथ त्रासदी को फ़िल्म से नाममात्र जोड़ा गया जबकि यह फ़िल्म का महत्त्वपूर्ण हिस्सा बनकर इसे बेहतरीन फ़िल्म बना सकता था ।जिस प्रकृति से हो रहे खिलवाड़ को दिखाए जाने की बात की जा रही थी, वह बीच में दम तोड़ता लगा। फ़िल्म के बाकी कलाकार जैसे नीतीश भारद्वाज, पूजा गोर तथा  अलका अमीन भी कुछ खास करते नज़र नहीं इसका एक मात्र कारण भी जानदार पटकथा का ना होना ही था। यह सही है कि केदारनाथ के खूबसूरत दृश्यों को बड़ी ही तकनीक से फिल्माया गया है।

सिनेमेटोग्राफर तुषार कांति  केदारनाथ की सुंदरता को कैमरे में कैद करने में बहुत हद तक सफल रहे हैं ,फ़िल्म में एडिटिंग भी कमाल की हुई है। लेकिन फ़िल्म इतनी तेजी से आगे बढ़ती है कि दर्शकों को समझ ही नहीं आता कि आखिर चल क्या रहा है। कहीं यह फ़िल्म एक हल्की फुल्की प्रेमकहानी नज़र आती है तो कहीं धर्म पर कटाक्ष करती औऱ कहीं प्रलय के दौरान लोगों की परेशानियों को दर्शाती मगर एक सही निर्देशन के आभाव में हर दृष्टिकोण से कहीं भी दर्शकों को संतुष्ट करने में कामयाब नहीं हो पाई। कुल मिलाकर कहा जाए कि अगर अभिषेक कपूर थोड़ा सा ध्यान भी इसकी  पटकथा तथा संगीत के साथ -साथ इसके क्लाइमेक्स को थोड़ा  और प्रभावी बनाते तो यह फ़िल्म मील का पत्थर साबित हो सकती थी। आज के दशक में इस तरह की प्रेमकहानी दर्शकों के गले नहीं उतर पाती। हम इस फ़िल्म को 2.5/5 स्टार ही देते हैं।

Andhadun- Grasping storyline will hold you obsessed for it

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Mystery, drama, thriller, Andhadhun houses everything that makes it the most entertaining one. Again Sriram Raghavan has ideally dished out his knack and served dollops of black humor. That’s the reason that Raghavan’s adept is above every other one.
This narrative of deceit, crime & fear is inspired by L’Accordeur, a French short movie or Olivier Treiner’s The Piano Tuner (2010). Talking about the characters, Ayushmaan Khurrana as Akash has played his role in really an applauding way. And, this role has clearly depicted Ayushmaan’s dexterity and versatility. Tabu, as always, was simply outstanding and excellently managed to keep her role alive with her vulnerable and erratic attitude as demanded by the script. Despite the lead characters, the aptitude of all other characters is not an exception. Ashwini Kalsekar, Chaya Kadam, Anil Dhawan, everyone has fully justified to their roles. Hold on, you can’t miss engaging background music that gave a haunting edge to this wonderful flick. And, all thanks to Amit Trivedi for this fascinating music layers.
The film has perfectly portrayed the ‘Idea of sight’ and stressing on who is actually blind, the one with no eyesight or the one who deliberately chooses to conceal & not to see the truth? The first half is coalesced of suspense, pounding stress and classic comedy. But the other half lacked a bit. However, the plot is so appealing that till the end you will keep on guessing and stay hooked. Yes, you will feel a little disappointed at elongate conversations, but still, the climax covers all this up and make it a piece worth watching.
The movie has managed the box office figures even from the very first day of its launch by minting Rs. 2.70 crores. In the first four days, it has earned about Rs. 18.40 crores, assuredly deserving applause. The first week is about to end and let’s see its weekly performance on the weekend.
Well, all said & done, Andhadhun flawlessly shores up to keep you riveted till the end. Go grab your tickets and watch this worthy stuff.

लम्बी यात्रा नहीं कर पाएगी SKF की लवयात्री

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मुंबई | सलमान खान के बैनर तले डायरेक्टर अभिराज मीनावाला की हाल ही में रिलीज़ हुई पहली फ़िल्म लवयात्री दर्शकों को बांधे रखने में पूरी तरह नाकाम साबित हुई। इस फ़िल्म के लिए सलमान खान का नाम भी कोई करिश्मा नहीं दिखा पाया।

कहानी-
अगर कहानी की बात करें तो फ़िल्म लवयात्री में वही घिसी-पिटी लवस्टोरी है जिसमें कुछ भी नयापन नहीं है। पूरी कहानी सुश्रुत बने आयूष शर्मा तथा मिशेल बनी वरीना हुसैन के इर्द-गिर्द घूमती है। लव एट फर्स्ट साइट की तर्ज पर सुश्रुत को गरबा नाईट में आई एनआरआई मिशेल से प्यार होना, रसिक बने रामकपूर द्वारा उसे नवरात्रि के नौ दिनों में उसे मिशेल का दिल जीतने के तरीके बताना, प्रेम कहानी शुरू होते ही मिशेल के पिता बने रोनित रॉय का इस रिश्ते के लिए इंकार कर देना और अंत में दोनों का मिलन दर्शकों को बांधे रख पाने में नाकाम साबित हुआ। कमजोर पठकथा कहीं- कहीं इतना बोर कर देती है कि दर्शक सीट छोड़ने पर मजबूर हो जाते हैं।

अदाकारी-
फ़िल्म की पठकथा चाहे कैसी भी हो यदि कलाकारों की अदाकारी अच्छी हो तो साधारण प्रेम कहानी पर बनी फिल्म भी जादू चला देती है, लेकिन लवयात्री की बात करें तो ना आयुष और ना ही वरीना दर्शकों की उम्मीदों पर खरे उतर पाए। रामकपूर भी कहीं ना कहीं अनुपम खेर की नकल करते नज़र आए। रोनित रॉय को देखकर लगता है कि वह अपने आप को गुसैल, घमंडी पिता की इमेज में कैद कर चुके हैं।

संगीत-

कुल मिलाकर लवयात्री का संगीत ही इसे दर्शकों को आकर्षित करता है। खासकर गरबा प्रेमियों के लिए इसका संगीत लम्बे समय तक उनको थिरकने पर मजबूर करता रहेगा। चौगाड़ा और ढोलीढ़ा गीत संगीत प्रेमियों को सिनेमाघरों तक खींचकर लाने में कामयाब रहेंगे। यह कहना गलत न होगा कि पूरी फिल्म में अगर कुछ दमदार है तो वो है इसका संगीत।

लोकेशन-
लवयात्री एक बड़े बजट की फ़िल्म है जिस पर दिल खोलकर खर्च किया गया है। बड़ोदरा, गुजरात से शुरू होकर विदेश की वादियों में फिल्माए सीन फ़िल्म में जान डाल देते हैं। बेशक लोकेशन की दृष्टि से भी फ़िल्म को थोड़ा- बहुत फायदा मिल सकता है।


सलमान खान का नाम भी नहीं दिलवा पाया आयुष शर्मा को पहचान-

केवल सलमान की झलक पाने के लिए उनके फैन सिनेमाघर तक लवयात्री को देखने एकबार जरूर जाएंगे। लेकिन अधिक समय तक इस फ़िल्म को याद भी रख पाएंगे ऐसा मुश्किल ही लगता है।
सलमान ने अपने बहनोई आयुष शर्मा को प्रमोट करने के लिए हर मुमकिन कोशिश की लेकिन फिर भी यह डेब्यू फिल्म वो करिश्मा नहीं दिखा पाई जिसकी इस फ़िल्म से उम्मीद की जा रही थी। आयुष अगर दर्शकों के दिल में जगह बनाना चाहते हैं तो उन्हें अदाकारी के गुण भी सीखने होंगे और पठकथा पर ध्यान भी देना होगा।

अंत में अगर चार शब्दों में इस फ़िल्म की समीक्षा की जाए तो इतना ही कह सकते हैं – खोदा पहाड़, निकली चुहिया।
प्रेमकहानी पसन्द करने वाले तथा संगीत प्रेमियों के लिए यह औसत मनोरंजक फ़िल्म साबित हो सकती है ।
अगर ओवरऑल रेटिंग की बात करें तो लवयात्री को हम देंगे 5 में से 2.5 स्टार

At first glance: Thugs of Hindostan

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Mumbai : The much awaited trailer of the highly anticipated movie was recently launched on Wednesday.

Set in the late 18th century (1795), during the days when the East India Company had started spreading its control over Indian territories, it chronicles the tale of the main protagonist KhudaBakhsh Azaad, played by Amitabh Bachchan who has taken up arms against the British. Fatima Sana Shaikh appears as one of the protagonist’s prominent gang members.

Amir Khan plays the antagonist Firangi Mallah, handpicked by the Company from near Kanpur (in what was then Awadh) to counter the threat of Azaad.

The trailer opens with a VFX-laden scene of naval warfare which honestly feels like an image taken out from a computer game. The implementation and tacit use of VFX in mainstream cinema is an art which is far from being mastered here.

The real engagement with the fans begins only when the scenes are humanized with two giants of Bollywood, Bachchan & Khan. All of Bachchan’s scenes from the trailer bear the same wooden expression though. Aamir Khan undoubtedly makes his presence felt and aces all the nuanced mannerisms of a petty thug who would make you believe that he is goofy.

However, given Khan’s range, the kohl-lined eyes, pierced nose and ears, curled locks and a jocker-esque sense of dressing feels like a shot tried too hard to drive the point home.

Katrina Kaif appears grooving as a dancer, gyrating her washboard midriff and pelvic thrusts. She ups the oomph quotient and we are definitely not complaining.

The director, Vijay Krishna “Viktor” Acharya collaborates with Khan and Kaif again after having worked with them for Dhoom 3.

With the ensemble cast so robust, expect the flaws in the storytelling to be flawlessly ironed out in this 210cr attempt to be a magnum opus from the banner of Yash Raj Films.

दर्शकों को अंत तक जोड़कर रखने में कामयाब हुई- सुई-धागा

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मुंबई: ‘दम लगा के हईशा’ का निर्देशन करने के बाद डायरेक्टर शरद कटारिया एक बार फिर लौटे हैं फिल्म ‘सुई धागा’ लेकर| एक सामान्य आदमी की जिंदगी के संघर्ष की कहानी है ‘सुई धागा’ जो मध्य प्रदेश के चंदेरी इलाके के उन कारीगरों की सच्चाई सामने लाती है, जो अपने हाथ के काम को मरने नहीं देना चाहते|

कहानी: मौजी (वरुण धवन) अपनी पत्नी ममता (अनुष्का शर्मा) के कहने पर अपना बिजनस शुरू करने का फैसला करता है| एक तरफ वह हमेशा डांटने वाले अपने मालिक से परेशान है दूसरी तरफ उसकी बीमार मां, यही नहीं ऊपर से मौजी पर हमेशा गुस्सा करने वाले उसके पिता। मौजी की पत्नी भी ज्वाइंट फैमिली की जिम्मेदारियों के बीच, घर के कामों के बीच उलझी हुई हैं| अपने रोजाना की परेशानियों के बीच मौजी (वरुण धवन) फिर भी हमेशा यही कहता है ‘सब ठीक है’। अपने परिवार वालों की मदद के बिना और बेईमान रिश्तेदारों के बीच मौजी अपना बिजनस कैसे जमा पाता है? और कैसे सफल बिजनसमैन बनता है इसके इर्द गिर्द घूमती कहानी, कहीं कहीं गुदगुदाती है तो कहीं मार्मिकता भरे दृश्यों से भावुक करती है|

रिव्यू: । चाहे मौजी की निजी समस्याएं हों, चाहे फिल्म किरदारों की तना-तनी, सभी ने पूरी ईमानदारी के साथ अपना किरदार निभाया है| और अनुष्का शर्मा ने तो ने साधारण नारी के उस कैरक्टर को पूरी तरह से जिया है| साधारण साड़ी वाली उस छवि को एक बार के लिए भूल नहीं पाओगे| सपॉर्टिंग किरदारों में रघुवीर यादव जो मौजी के पिता के रूप में अपनी एक्टिंग से दर्शकों को काफी इम्प्रेस करते हैं। मौजी की मां के रूप में आभा परमार का अभिनय भी काबिल-ए-तारीफ़ है जो अपने किरदार के साथ न्याय करती हैं।

टेक्नीकल राउंड :’मेक इन इंडिया’ प्रोजेक्ट के थीम को ध्यान रखते हुए बनाई गई फिल्म ‘सुई धागा’ को फिल्माने में निर्देशक ने कोई कसर नहीं छोड़ी है| फिल्म में छोटी मोटी कमियां भी हैं| वरुण धवन की पत्नी के किरदार में अनुष्का शर्मा पहली बार नज़र आ रही हैं| डायरेक्टर शरद कटारिया ने फिल्म को काफी रियल रखा है। फिल्म के सभी किरदारों ने बहुत मेहनत की है| फिल्म के फर्स्ट हाफ में सभी किरदार अपनी समस्याओं के साथ पूरी तरह कहानी में उतर जाते हैं। डायलॉग्स का अंदाज भी ऐसा है जो आम लोगों की रोजाना की समस्या को पेश करते हैं और गुदगुदाते हैं। फिल्म के गाने भी कहानी से मेल खाते हैं, फिल्म के गीत अनु मलिक द्वारा रचित हैं जबकि गीत वरुण ग्रोवर द्वारा लिखे गए हैं। फिल्म का एल्बम 21 सितंबर 2018 को वाईआरएफ संगीत द्वारा जारी किया गया था।।
Track Name Singer
1. “Chaav Laaga” Papon, Ronkini Gupta
2. “Khatar Patar” Papon
3. “Tu Hi Aham” Ronkini Gupta
4. “Sui Dhaaga” Divya Kumar
5. “Sab Badhiya Hai” Sukhwinder Singh, Salman Ali

हालांकि का दूसरा हिस्सा इमोशनल है और यह हिस्सा आपके दिल को छू लेगा| फिल्म में नमित दास और गोविंद पांडेय का अभिनय भी काफी लुभावना है और रघुबीर यादव वरुण धवन के पिता का रोल बहुत अच्छे ढंग से निभा रहे हैं| फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर भी काबिल-ए-तारीफ़ है|

धीमे-धीमे जादू कर रही है ट्रायएंगल लव स्टोरी ‘मनमर्जियां’

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अभिषेक बच्चन, तापसी पन्नू और विक्की कौशल की फिल्म ‘मनमर्जियां’ शुक्रवार को रिलीज हो गई है। अनुराग कश्यप पहली बार एक लव स्टोरी लेकर आए हैं हालंकि उन्होंने लव स्टोरी को भी अपने अंदाज से ही बनाया है जो इस फ़िल्म को दूसरी लव स्टोरीज से अलग करती है| इससे पहले अनुराग की फ़िल्में गैंगस्टर हिंसा, डर, व्यक्तिगत अपराध से जुड़े मुद्दों के लिए जानी जाती हैं, जिनके नायक अक्सर अत्यधिक ड्रग्स, धूम्रपान या शराब पीते हुए दिखाई देते हैं| इसी के साथ ही अभिषेक बच्चन की फिल्म में वापसी ने अपने प्रशंसकों को खुश कर दिया है।

यह एक ट्रायएंगल लव स्टोरी है जिसमें आज के दौर के इश्क को बेहतरीन तरीके से दर्शाया है| फिल्म की कहानी रूमी, विक्की और रॉबी के इर्द-गिर्द घूमती है|

विक्की की भूमिका निभा रहे हैं विक्की कौशल, रूमी के किरदार में हैं तापसी पन्नू और अभिषेक बच्चन ने रूबी का रोल किया है जो पंजाब में के रहने वाले हैं| विक्की और रूमी एक दूसरे से बहुत प्यार करते हैं, लेकिन विक्की जिम्मेदारियों से भागता है| रूमी विक्की से कहती है कि वो उसके घर शादी का प्रस्ताव लेकर जाए जिसे सुनकर विक्की सकपका जाता है।

रूमी को समझ में आने लगता है कि विक्की एक गैर ज़िम्मेदार लड़का है। अब इनकी लव स्टोरी में एक नया खिलाड़ी आ जाता है और वो है रूबी यानि कि अभिषेक बच्चन जिसमें एक परफेक्ट हसबैंड वाले सभी गुण मौजूद हैं| उसे पहली नज़र में रूमी से प्यार हो जाता है। विक्की के धोखे से टूट चुकी रूमी को रूबी का सहारा मिलने लगा और बात यहाँ तक पहुँच जाती है कि रूमी, रूबी से शादी कर लेती है। लेकिन जल्दी ही विक्की की वापसी होती है और वो अपनी गलतियां सुधारने को तैयार है। अब रूमी क्या फैसला लेगी फिल्म इसी के इर्द गिर्द घूमती है।

टेक्निकल राउंड: फिल्म में प्यार, इमोशन और कॉमेडी का अच्छा संगम है| ट्रेड एनालिस्ट तरण आदर्श की रिपोर्ट के मुताबिक फिल्म ने पहले दिन 3.52 करोड़ और दूसरे दिन शनिवार को 45.17% की बढ़त के साथ 5.11 करोड़, इस तरह दो दिनों में कुल ₹ 8.63 करोड़ कमाई की है| एक्टिंग की बात करें तो निर्देशक ने तीनों मजबूत मोहरों, अभिषेक, तापसी और विक्की कौशल को अच्छे ढंग से उतारा है| फिल्म में आज के दौर के इश्क को दर्शाया गया है जिसमें बे-झिझक शारीरिक संबंध होते हैं| इस फिल्म की पटकथा बेहतरीन है और डायलॉग भी अच्छे हैं जो बहुत जगह हंसाते हैं| क्लाइमेक्स वैसा ही है जो हम अक्सर कई फिल्मों में देखते हैं लेकिन मनमर्जियां के उसी क्लाइमेक्स को कुछ अलग तरह से पेश किया गया है|
विक्की कौशल और अभिषेक बच्चन ने अपनी भूमिका को बेहतरीन निभाया है, तापसी भी लाजवाब है| हालांकि कहीं कहीं फिल्म में लगता है कि इसकी लेंथ को थोड़ा कम किया जा सकता था| फिल्म का संगीत कहानी के साथ मेल खाता है, बावजूद इसके फिल्म के सांग्स जुबान पर चढ़ने वाले नहीं हैं| फिल्म में संगीत अमित त्रिवेदी का है और इसके प्रोडूसर आनंद एल राय और फैंटम फिल्म्स है|फिल्म का डिस्ट्रीब्यूटर Eros इंटरनेशनल है|

सोशल मीडिया के दौर की यह कहानी युवाओं को बाँध कर रखने वाली है, कुल मिलाकर इस फिल्म को बॉलीवुड हॉंक 3.5 रेटिंग देती है|

जानिए डराने में कितनी कामयाब हुईं श्रद्धा…Stree Movie Review

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Mumbai | महज 20 करोड़ के बजट में तैयार की गई फिल्म ‘स्त्री’ ने केवल चार दिन में लगभग 42 करोड़ के कमाई कर लागत से डबल वाला आंकड़ा पार कर लिया है| यह देश के कुछ हिस्सों में प्रचलित एक अवधारणा पर आधारित फिल्म है। अमर कौशिक द्वारा निर्देशित इस फ़िल्म में राजकुमार राव और श्रद्धा कपूर के साथ पंकज त्रिपाठी, अपारशक्ति खुराना, और अभिषेक बनर्जी ने भूमिका निभाई हैं। इस फिल्म के सभी कलाकार अपने अपने रोल के मुताबिक परफेक्ट हैं|

फिल्म की कहानी:

फिल्म स्त्री एक विचित्र घटना से प्रेरित है।फिल्म में विक्की (राजकुमार राव) मध्यप्रदेश के एक कस्बे चंदेरी में एक टेलर है। वहां की अवधारणा के मुताबिक़ कुछ खास दिनों में कोई रूह, स्त्री का रूप धारण कर घर के मर्द का नाम लेकर दरवाजे पर दस्तक देती है और अगर कोई पुरुष दरवाजा खोल देता है, तो वह उसे अपने साथ ले जाती है। बाहर बस उसके कपड़े पड़े रह जाते हैं।
उससे बचने के लिए लोग अपने घर के बाहर ‘ओ स्त्री कल आना’ लिख देते हैं, जिसे पढ़ कर वह प्रेतात्मा लौट जाती है| विकी को एक रहस्यमय लड़की (श्रद्धा कपूर) से प्यार हो जाता है और वह अपने दोस्त बिट्टू (अपारशक्ति खुराना) और जना (अभिषेक बनर्जी) को उस लड़की के बारे में बताता है| उस लड़की के अजीब व्यवहार के कारण विकी के दोस्त उस लड़की को ‘स्त्री’ मानने लगते हैं|
इस बीच विकी का दोस्त जना भी गायब हो जाता है। तब बिट्टू, विक्की को स्त्री की अजीब हरकतों के बारे में समझाता है और उससे छुटकारा पाने के लिए वे रुद्रा (पंकज त्रिपाठी) की शरण में जाते हैं, जो उन्हें स्त्री की सच्चाई से परिचित करवाता है। वे लोग उसे खोजते हुए एक भूत बंगले में पहुंचते है, जहां विकी का सामना स्त्री से होता है। जब एक रात शहर के कई और लोग गायब हो जाते हैं तो उन्हें बचाने के लिये वे लोग ‘स्त्री’ पर आधारित किताब के लेखक शास्त्री (विजय राज) से जानते हैं कि केवल विकी ही उसे मार सकता है। विकी स्त्री की चोटी काटकर उसकी शक्ति खत्म कर देता है। बाद में पता चलता है कि वह असल में जादू करने वाली रहती है और वह स्त्री के शक्ति के पीछे थी और वह विकी की मदद से उसे प्राप्त करना चाहती थी। वह उसकी कटी चोटी को अपने मे मिला कर बस से गायब हो जाती है। अगले साल त्यौहार के समय स्त्री पुन: शहर पहुंचती है लेकिन शहर के द्वार में लगे उसके पुतले को देखती है जिसमें “ओ स्त्री रक्षा करना” लिखा देखकर वह वापस चली जाती है।

– टेक्नीकल राउंड : फिल्म की कहानी बहुत दमदार नहीं है और जिस अंदाज़ से फिल्म की कहानी को शुरू से रिवील किया गया है वैसा समेट नहीं पाए| एक तरफ फर्स्ट हाफ में फिल्म मजेदार है, तो सेकंड हाफ में कहीं कहीं डरावनी भी है| फिल्म में कुछ बातें अस्पष्ट भी हैं जैसे रूद्र एक मृत महिला से फोन पर बात करता रहता है। लगता है इसके पीछे के रहस्य को फिल्म में बताना ही भूल गए। लेकिन फिल्म हंसाने वाले वन लाइनर, शानदार लोकेशन और बेहतरीन एक्टर्स की वजह से मनोरंजन से भरपूर है, ये खूबियां फिल्म की कमजोरियों पर भारी पड़ती है।फिल्म में हॉरर कॉमिडी का एक नया जॉनर है और फिल्म को वास्तविकता की ज़मीन पर फिल्माने के लिए इसकी शूटिंग भोपाल के पास एक ऐसी जगह की गई है, जहां ऐसी घटनाओं के बारे में सुनने में आता है।
फिल्म में सुमित अरोड़ा के डायलॉग काफी हद तक मजेदार हैं, कहीं कहीं आपको पेट पकड़कर हंसने पर मजबूर कर देंगे| वहीँ फिल्म में दो आइटम नंबर भी हैं| केतन सोढा ने बेहतरीन बैकग्राउंड स्कोर दिया है। देसी रोल में पंकज त्रिपाठी ने एक बार फिर शानदार ऐक्टिंग से मनोरंजन किया है|

Padmaavat: The real treat to the eyes amid winter season

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Due to controversies and ban imposed in some states, Padmaavat has been released on Thursday on January 25, 2018, amid tight security. Directed by Sanjay Leela Bhansali, who is known for making the royal movies as like Devdas, Ramleela; Padmaavat has faced trouble in many parts of some states such as Rajasthan, Madhya Pradesh, Uttar Pradesh, and Haryana etc. on the one hand while on the other hand a huge part of moviegoers has given it a thumbs-up. On one side, Ranveer Singh played Alauddin Khilji, has won the heart of the audience while on the other side Deepika, as well as, Shahid and other co-stars played their characters as they are living these characters in reality. The movie has got a place in 100+ crore club as on 4 th day of the release. It has earned 110 crore till 4th day of release.

Story-wise, the movie is good enough to drag the viewers towards the theatres to watch and if we draw our attention to the acting style and emotions represented by the star cast, we will get flabbergasted by the work and dedication of the cast. Although the sensor board has removed some scenes from the movie still you can enjoy the royal views of the forts and a good story in this movie.

The story falls in the medieval Rajasthan. Rani Padmaavati was said to be one of the most adorable women of her time. The story shows the beautiful and romantic bond of the king and the queen on the one side, while on the other side Ranveer shows his lustful eyes in the movie to represent Khilji on screen. The king and queen used to live in Chittorgarh Quila. Khilaji attacked on the fort, and conquered it. Rani Padmini listened to this and performed ‘Johar’ for her self-respect. The movie is full of colours, romance, action, and royalty. The movie seems to be pronounced as superb. The flawless acting of the crew has made it more interesting.

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Hey Bro
Release Date: 06 March