कबीर सिंहः- एक अनोखी लव स्टोरी

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मुबईः- बेइंतहा प्यार करने प्यार में कुर्बान हो जाने वाले प्रेमी और प्यार में तबाह हो जाने वाले प्रेमी । प्रेम के ऐसे कई स्वरूप बॉलीवुड ने हमें समय- समय पर दिखाए है। बॉलीवुड की तकरीबन सारी हिट फिल्मों में यही फार्मुला भी नजर आता है। कमर्शियल फिल्मों की रीढ़ की हडी़ होती है प्यार।

लेकिन कबीर सिंह इन सब कैटेगरी में आते हुए भी बेहद सफाई से इन सब से बाहर निकल जाते है। अपनी काॅलेज लाइफ की महबुबा प्रीती से एक दम अपारंपारिक ढ़ग से प्यार करने वाले कबीर सिंह शाहिद कपुर कभी भी अपनी पे्रमीका प्रीती कियारा आड़वाणी से यह नही पुछता कि वह उससे प्यार करती है या नही। बस वह पहली नजर से उससे प्यार करने लगता है। और प्रीती को भी उससे कब प्यार हो जाता है उसे खुद पता नही चलता।

लेकिन चीजें तब बिगड़ जाती है जब प्रीती के पिताजी शादी के लिए मना कर देते है। और उसकी शादी किसी ओर से कर देते हैं। यही से शुरू होती है कबीर सिंह का वह सफर जिसमें वह अपने आप को तबाह करना शुरू करता है।

युवावस्था का दिशा भ्रम परिस्थिति के सही आकलन का अभाव और सब कुछ खो देने का पूर जोर एहसास कबीर को पतन के रास्ते पर ढकेल देता हैं। जहा से कबीर का लौटना लगभग नामूमकिन सा हो जाता हैं। नशे में खोया एक बेहतरिन सर्जन हैं।

Kabir Singh

इस काम में कभी उसे असफलता नही मिली , मगर एक घटना के बाद कबीर से वह काम भी छूट जाता हैं ,और उसके बाद उसकी पुरी  जिदंगी में क्या-क्या होता है। इसी ताने-बाने पर बुनी गई हैं कबीर सिंह। शायद कहानी आपको सुनी हुई सी लगती होगी मगर निर्देशक संदीप रेडी वांगा ने इस कहानी को कहने का जो तरिका सामने लाया हैं वह एक दम अनोखा हैं।

फिल्म की हर एक फ्रेम संदीप की गिरफत में रही । एक ऐसे नायक की कहानी कहना जिससे हीरोइज्म का बिल्कुल अभाव हो मगर साथ-साथ आपको उससे प्यार भी होता रहे इसे पेश करना बेहद मुश्किल काम हैं जिसे संदीप ने बखूबी निभाया फिल्म के सारे क्राफट को संदीप ने बड़ी ही खुबसुरती के साथ इस्तेमाल किया हैं ,चाहे वो स्क्रीनप्ले हो या सिनेमैटोग्राफी , बैकग्राउंड स्कोर हो या गाने ,इन सभी को संदीप ने फिल्म को अलग स्तर पर ले जाने के लिए किरदार की तरह इस्तेमाल किया हैं ।

अभिनय की बात की जाए तो शाहिद कपूर एक बार फिर साबित करते नजर आते हैं भूमिका कितनी ही मुश्किल क्यो न हो वह उसे साध ही लेते हैं । जिंदगी को तबाह करने वाला एक सर्जन । इन सारे ही रंगो को शाहिद ने खुबसुरती से अंजाम दिया ।

कियारा अडवाणी का किरदार मेरी समझ से थोड़ा कमजोर किरदार रहा वही शाहिद के सामने इतनी बेबस क्यों रही इसका कोई या लाॅजिक फिल्म में कही पर नजर नही आया । लेकिन फिर भी अडवाणी ने प्रीति जी को लिया ।

इसके अलावा लीजेंडरी एक्टर कामिनी कौशल , सुरेश ओबरॉय  जैसे कलाकारो ने अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई। सबसे उल्लेखनीय परफोर्मेंस कबीर सिंह के दोस्त बने सोहम मजूमदार का हैं ।

जिन्होने साबित कर दिया कि एक बेहतरिन अभिनेता हैं । फिल्म की लंबाई आपको खल सकती हैं। साथ ही हिरोईन की मासुमियत इटंरवेल तक आपको सोचने में मजबूर कर सकती हैं ।